बिलासपुर में बड़ा खुलासा! नियमों को ताक पर रखकर पास हुआ बिल्डिंग नक्शा? 60 की जगह 90 फ्लैट निर्माण से मचा हड़कंप, प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप
बिलासपुर शहर में भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। तालापारा स्थित अज्ञेय नगर में संचालित मेसर्स अनंत रियाल्टी प्रोजेक्ट में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी कर निर्माण की अनुमति देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 60 फ्लैट की स्वीकृति के स्थान पर 90 फ्लैट और अतिरिक्त मंजिलों के साथ नक्शा पास कर दिया गया, जिससे नगर निगम और नगर ग्राम निवेश (टी एंड सीपी) के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में संचालित 177 अवैध संस्थानों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठ चुका है। इस पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने की घोषणा की है। एरिया स्टेटमेंट और नक्शे में बड़ा अंतर जानकारी के मुताबिक मेसर्स अनंत रियाल्टी प्रोजेक्ट के बिल्डर नमन गोयल ने अनुमोदन के लिए जो एरिया स्टेटमेंट प्रस्तुत किया, उसमें केवल चार मंजिलों पर 60 फ्लैट निर्माण का उल्लेख किया गया था। लेकिन उसी प्रोजेक्ट के स्वीकृत नक्शे में फ्लैटों की संख्या बढ़ाकर 90 और मंजिलों की संख्या छह दर्शाई गई है। इस अंतर को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि दस्तावेजों में हेरफेर कर नियमों के विपरीत निर्माण की अनुमति दी गई। मिलीभगत के आरोप स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि बिल्डर और संबंधित विभागों के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से यह पूरा खेल हुआ। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ भवन में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। अधिकारी का पक्ष इस मामले में नगर निगम के बिल्डिंग ऑफिसर का कहना है कि संबंधित प्रोजेक्ट को पहले ही आवश्यक अनुमति मिल चुकी थी और नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की गई है। हालांकि एरिया स्टेटमेंट और स्वीकृत नक्शे में अंतर को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। जांच की मांग तेज मामला सामने आने के बाद शहर में निर्माण अनुमति प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। नागरिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और बिल्डर पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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